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झारखंड विधानसभा चुनाव: बीजेपी के झारखंड चुनाव हारने की वजह लोगों ने बताई

झारखंड में सत्ताधारी भाजपा फिसलती दिख रही है और झारखंड मुक्ति मोर्चा की अगुवाई वाला गठबंधन शासन में आता नज़र आ रहा है.

सारे नतीजों का ऐलान अभी बाकी है लेकिन रुझानों से साफ़ है कि सत्ता की चाबी भाजपा के हाथ से निकल गई है.

लेकिन इस हार की वजह क्या है? नरेंद्र मोदी का करिश्मा भी इस राज्य में क्यों काम नहीं आया? क्या नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी का मुद्दा यहां नहीं चला? क्या ये नरेंद्र मोदी की हार है या भाजपा के नेता रघुवर दास की हार है?

‘ये सब कुछ तानाशाही की वजह से है. लोगों की ज़रूरतों और भावनाओं की तरफ़ ध्यान ना देने की वजह से है. सभी राजनीतिक दलों से आग्रह है कि वो ये समझें कि रैलियों में जुट रही भीड़ बेरोज़गारों की है, ना कि पार्टी समर्थकों की. वो आते हैं, रैली में रहते हैं, पैसा बनाते हैं. इसके अलावा कुछ नहीं.”

मुकेश कुमार सिंह ने शायराना अंदाज़ में लिखा है, ”ये शान-ओ-शौकत-ऐ-आलम, सदा किसी की नहीं. चिराग सबके बुझेंगे, हवा किसी की नहीं.”

विहान ख़ान का कहना है, ”हर बार राष्ट्रीय मुद्दे नहीं चलते, कुछ काम भी करना पड़ता है. जनता को राष्ट्रीय मुद्दे रास नहीं आ रहे. जनता जाग गई है.”

डॉक्टर अरविंद कुमार ने झारखंड के लिए आदिवासी मुद्दे को रेखांकित करते हुए लिखा है, ”प्रधानमंत्री का आदिवासी न होना.”

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