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जीएसटीः रिटर्न फाइल करने में आती है परेशानी, तो यह उपाय होगा कारगर

[: वस्तु और सेवा कर (गुड्स एंड सर्विस टैक्स या जीएसटी) की प्रणाली की शुरुआत हमारे देश में विकास की रफ्तार को तेज करने और उत्पादकों पर टैक्स देने का बोझ कम करने के लिए की गई थी। हालांकि इस सिस्टम ने रिटर्न भरने की प्रणाली को आसान बनाने की कोशिश की है, लोकिन अब भी सूक्ष्म, लघु और मध्यम उपक्रमों (एमएसएमई) को जीएसटी के तहत टैक्स रिटर्न फाइल करने में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
: अब जीएसटी प्रणाली में कुछ बदलाव किए गए हैं। इस सिस्टम में छोटे कारोबारियों को राहत दिलाने के लिए छूट की सीमा को बढ़ाया गया है। इस प्रणाली ने लघु करदाताओं का वर्गीकरण कर दिया है। इसके एक वर्ग में सालाना 5 करोड़ के टर्नओवर वाले कारोबारियों को रखा गया है, जबकि दूसरे वर्ग में 5 करोड़ से ज्यादा के औसत टर्नओवर वाले ज्यादा टैक्स देने वाले कारोबारी हैं।

जीएसटी कानून में किए गए बदलाव के अनुसार कम टैक्स अदा करने वाले करदाताओं के वर्ग आने वाले सभी सूक्ष्म, लघु और मध्यम उपक्रमों को तीन महीने में एक बार रिटर्न फाइल करने की इजाजत दी गई है,जबकि बड़े करदाताओं के लिए हर महीने रिटर्न भरना आवश्यक बनाया गया है।
एचएसएन कोड का पता लगाना एक चुनौती
एचएसएन या “हार्मोनाइज्ड सिस्टम ऑफ नॉमेनक्लेचर” वस्तुओं और सेवाओं के वर्गीकरण का एक अंतरराष्ट्रीय तरीका है। मासिक रूप से जीएसटीआर 3 बी फाइल करने के लिए सप्लाई की जाने वाली वस्तुओं के इंटरनेशनल कोड का विस्तृत विवरण भरने की आवश्यकता नहीं है। एचएसएन कोड का पता लगाते हुए महीने में या हर तीन महीने में जीएसटी फाइल करने में काफी समय और मेहनत लगती है। बिक्री की हर वस्तु का एचएसएन कोड पता लगाना काफी मुश्किल काम है। हालांकि अगर दीर्घकालीन अवधि में देखें तो जीएसटी प्रणाली के साथ सिस्टम को एकीकृत न करने से इंडस्ट्री पर कई प्रभाव पड़ सकते हैं।

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