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जानें बजट 2020-21 को लेकर कैसी है इनकी उम्‍मीदें, वित्‍तमंत्री के लिए भी है चुनौती

आर्थिक फ्रंट पर मुश्किलों के बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को अपना दूसरा बजट पेश कर रही हैं। वर्तमान वित्त वर्ष के दौरान देश की जीडीपी ग्रोथ रेट 5% रहने की उम्मीद है, जो 2018-19 में दर्ज 6.8% की तुलना में काफी कम है। इसके अलावा, बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी के बढ़ते स्तर, निजी निवेश में बड़ी कमी समेत आर्थिक मोर्चे पर मौजूद अन्य चुनौतियां के बीच वित्त मंत्री के लिए यह बजट पेश करना थोड़ा मुश्किल जरूर है। आर्थिक मुश्किलों से निकलने के साथ ही 2025 तक भारत का 5 ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी बनने का सपना भी काफी कुछ इस बार के बजट पर निर्भर करता है।

एक आम आदमी के नजरिये की बात करें तो वह अपनी जरूरतों की चीजों की कीमतों में कमी चाहता है। वहीं दूसरी तरफ उद्योग कहीं टैक्‍स में छूट चाहता है तो कहीं व्‍यापार के लिए ढांचागत सुविधाएं चाहता है। इन सभी की मनोदशा को जानते और भांपते हुए सरकार देश की अर्थव्‍यवस्‍था को गति देना चाहती है। हम सब ये भी जानते हैं कि वित्‍तमंत्री को इनसे ही कोई बीच का रास्‍ता निकालना होगा। गौरतलब है कि किसी भी अर्थव्‍यवस्‍था की नींव उस देश का उद्योग जगत ही तैयार करता है। यदि कहा जाए कि वही मांग और पूर्ति का भी जनक है तो गलत नहीं होगा। ऐसे में बजट 2020-21 को लेकर उद्योग जगत क्‍या सोच रहा है इसको भी जानना बेहद जरूरी है।

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