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जम्मू-कश्मीर में पाबंदियों पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा- जितनी जरूरी स्वतंत्रता, उतनी सुरक्षा भी

जम्मू-कश्मीर पर संचार माध्यमों पर लगी पाबंदियों पर जस्टिस एनवी रमना अगुवाई वाली तीन सदस्यीय पीठ ने स्वतंत्रता के साथ-साथ सुरक्षा की भी वकालत की। पीठ ने कहा, हम प्रतिबंधात्मक आदेशों के पीछे की राजनीतिक मंशा पर सवाल नहीं उठा रहे हैं। बार-बार यह सवाल हमारे सामने आता है कि लोगों की स्वतंत्रता ज्यादा जरूरी है या फिर उनकी सुरक्षा। 

पीठ ने कहा, हम इस बात में पड़ना ही नहीं चाहते हैं कि आजादी जरूरी है या फिर सुरक्षा। हमारी चिंता बस यही है कि लोगों की स्वतंत्रता और सुरक्षा के बीच एक संतुलन कायम किया जाना चाहिए। हम केवल यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि नागरिकों को उनके सभी पर्याप्त अधिकार और आजादी तो मिले हीं, साथ में उनकी सुरक्षा भी हो।

वहीं, जम्मू-कश्मीर प्रशासन को फटकार लगाते हुए पीठ ने कहा, मजिस्ट्रेट को धारा 144 के तहत पाबंदियों के आदेश देते समय नागरिकों की स्वतंत्रता और सुरक्षा में तालमेल बिठाते हुए अपने विवेक का इस्तेमाल करना चाहिए। बार-बार एक ही तरीके के आदेश जारी करना सही नहीं है। इंटरनेट बंद करना न्यायिक समीक्षा के दायरे में आता है। कश्मीर में सुरक्षा के साथ-साथ मानवाधिकार और स्वतंत्रता के बीच संतुलन साधने की कोशिश होनी चाहिए। सरकार को पाबंदी के सभी आदेशों को प्रकाशित करना चाहिए ताकि प्रभावित लोग अदालत जा सकें।

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