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क्या आकाश मिसाइल के लिए घटिया प्रेशराइज्ड गैस कंटेनर खरीदेगी वायुसेना? BEL का उपकरण हुआ फेल!

सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रतिरक्षा आकाश प्रणाली सेना के साथ-साथ वायुसेना में भी शामिल हो चुकी है। सेना को यह मिसाइल प्रणाली भारत डायनामिक्स लिमिटेड (बीडीएल) आपूर्ति करती है, तो वायुसेना के लिए भारत इलेक्ट्रानिक लिमिटेड (बीईएल)। दोनों ही सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां हैं। बीईएल इस प्रणाली के लिए रडार प्रणाली और इलेक्ट्रानिक उपकरण भी बनाती है। लेकिन वायुसेना के सूत्र बताते हैं कि बीईएल का प्रेशराइज्ड गैस कंटेनर बीडीएल के मुकाबले में घटिया है।वायुसेना के तुलनात्मक परीक्षण में यह फेल हो चुका है, लेकिन सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी होने के कारण वायुसेना के अधिकारियों को बीईएल कंटेनर की रेस से बाहर कर पाना मुश्किल हो रहा है।

रूस, अमेरिका समेत रक्षा क्षेत्र के महारथी देश अपनी मिसाइल्स को प्रेशराइज्ड गैस कंटेनर में रखते हैं। आमतौर पर इस कंटेनर में नाइट्रोजन गैस का प्रयोग होता है। इससे कंटेनर के भीतर मिसाइल को अनुकूल वातावरण मिल जाता है और इसका असर उसकी लाइफ साइकिल पर पड़ता है। ब्रह्मोस कांप्लेक्स के सूत्र के अनुसार इससे मिसाइल की लाइफ साइकिल बढ़ जाती है।

मिसाइल में मॉइश्चर आदि के चलते किसी तरह की खराबी आने का खतरा नहीं रहता। कुछ साल पहले तक भारत अपनी मिसाइलों को पारंपरिक इस्पात के कंटेनरों में ही रखता रहा है। बताते हैं रक्षा मंत्री मनोहर पार्रिकर के समय में उनके सामने इस परियोजना का खाका खींचा गया था और उनके प्रयास से भारत ने भी अपनी मिसाइल प्रणाली को प्रेशराइज्ड गैस कंटेनर में यूजर्स (सेना, वायुसेना, नौसेना) को देने का फैसला किया था। सेना के लिए बीडीएल ने तो वायुसेना के बीईएल ने प्रेशराइज्ड गैस कंटेनर की आपूर्ति भी शुरू की। पहला प्रयोग आकाश मिसाइल प्रणाली पर हुआ।

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