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कैसे चुने गए गगनयान के लिए अंतरिक्ष यात्री


इसके बाद सिवन ने घोषणा की कि चयनित अंतरिक्ष यात्रियों को भारत में बुनियादी प्रशिक्षण दिया जाएगा और आगे के प्रशिक्षण के लिए विदेशी अंतरिक्ष एजेंसियों से सहायता ली जाएगी.
जहां तक भारत में अंतरिक्ष लॉन्च का संबंध है तो अंतरिक्ष यात्रियों की चयन प्रक्रिया का काम इंस्टीच्यूट ऑफ़ एयरोस्पेस मेडिसिन कर रही है. इसने 1957 में भारतीय वायु सेना के एक सहयोगी के रूप में काम शुरू किया था. यह पायलटों को प्रशि​क्षित करने में भारतीय वायु सेना की मदद कर रहा है. यही कारण है कि अंतरिक्ष यात्रियों के चयन का काम इस एजेंसी को सौंपा गया.
अंतरिक्ष में जाने वाले अंतरिक्ष यात्री अच्छे पायलट होने चाहिए. इसके अलावा उनकी पृष्ठभूमि इंजीनियरिंग की भी होनी चाहिए. पहले अंतरिक्ष यात्रियों के चयन के लिए उत्साही लोगों से आवेदन मांगे जाते हैं. इस उद्देश्य के लिए भारतीय वायु सेना के पायलट विभाग में आंतरिक रूप से अधिसूचना जारी की जाएगी. आवेदनकर्ताओं का मूल्यांकन किया जाएगा और योग्य उम्मीदवारों को चयन किया जाएगा. चयनित प्रत्याशियों के अंतरिक्ष यात्रा के लिए उनके शारीरिक योग्यता जाँच के लिए कुछ मेडिकल टेस्ट किए जाएंगे.
सफल प्रत्याशियों को आगे के परीक्षणों के लिए ले जाया जाएगा.
दूसरे चरण में चयनित पायलटों का शारीरिक प​रीक्षण किया जाएगा. जो शारीरिक टेस्ट में चयनित हो जाएंगे उनका चयन बुनियादी अंतरिक्ष परीक्षण के लिए किया जाएगा.
इंस्टीट्यूट ऑफ़ एयरोस्पेस मेडिसिन एयर कॉमर्स ने ऐस्ट्रनॉट सलेक्शन एग्रीमेंट पर कहा कि वे 30 भारतीय वायु सेना के पायलटों में से शौक़ रखने वाले का चयन करेंगे. उनमें से 15 को अंतरिक्ष यात्रियों के रूप में बुनियादी प्रशिक्षण दिया जाएगा और आख़िर में नौ का चयन किया जाएगा और उन्हें विदेश में पूर्णकालिक अंतरिक्ष यात्री का प्रशिक्षण दिया जाएगा.

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