राष्ट्रीय समाचार

कायम है मोदी सरकार में तीन रिटायर्ड आईपीएस अधिकारियों का रुतबा और दबदबा

साल 2020 में भी इन तीन रिटायर्ड आईपीएस अधिकारियों का रुतबा और दबदबा कायम है। 2014 के दौरान जब पहली बार मोदी सरकार बनी, तभी से ये अधिकारी किसी न किसी अहम पद पर आ गए थे। गत वर्ष जब मोदी सरकार 2.0 का आगाज हुआ, तो इन तीनों अधिकारियों का न केवल रुतबा बढ़ा, बल्कि दबदबा भी देखने को मिला। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को कैबिनेट रैंक मिला, तो वहीं एनआईए के पूर्व चीफ रहे शरद कुमार केंद्रीय सतर्कता आयुक्त (सीवीसी) जैसे अहम पद पर बैठ गए।2019 के अंत में सीआरपीएफ के पूर्व डीजी के. विजय कुमार को केंद्रीय गृह मंत्रालय में केंद्र शासित प्रदेश जेके और लेफ्ट विंग चरमपंथ (एलडब्ल्यूई) प्रभावित राज्यों के सुरक्षा संबंधी मामलों पर सलाह देने के लिए वरिष्ठ सुरक्षा सलाहकार नियुक्त कर दिया गया। 

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत कुमार डोभाल केरल कैडर के सेवानिवृत्त भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी है। वे पूर्व भारतीय खुफिया और कानून प्रवर्तन अधिकारी भी रहे हैं। 1945 में उत्तराखंड में जन्मे डोभाल को भारत का सबसे युवा पुलिस अधिकारी बताया जाता है। उन्हें सैन्य कर्मियों को दिए जाने वाले वीरता पुरस्कार कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया है। सितंबर 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक और फरवरी 2019 के दौरान पाकिस्तान की सीमा में की गई बालाकोट एयर स्ट्राइक भी डोभाल की निगरानी में की गई थी।

उन्होंने डोकलाम गतिरोध को समाप्त करने में अहम भूमिका निभाई थी। पूर्वोत्तर में उग्रवाद से निपटने के लिए डोभाल की निगरानी में कई बड़े फैसले लिए गए। इस साल जम्मू कश्मीर में खत्म किए गए अनुच्छेद 370 के बाद वहां के हालात को सामान्य बनाने के लिए जो रणनीति बनी, उसके पीछे डोभाल का हाथ रहा है। वे खुद भी वहां कई बार गए थे। मोदी सरकार 2.0 के गठन के बाद डोभाल को पांच वर्षों के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के रूप में दोबारा से नियुक्त किया गया। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार के दूसरे कार्यकाल में उन्हें कैबिनेट रैंक दिया गया है।

डोभाल ने 1968 में आईपीएस अधिकारी के रूप में अपना पुलिस कैरियर शुरू किया। वे मिजोरम और पंजाब में उग्रवाद विरोधी अभियानों में सक्रिय रूप से शामिल हुए। उन्होंने 1999 में कंधार में अपहृत आईसी-814 विमान से यात्रियों की सुरक्षित रिहाई में अहम योगदान दिया था। वे उस वक्त के तीन वार्ताकारों में से एक थे। कहा जाता है कि डोभाल ने पाकिस्तान में सक्रिय आतंकवादी समूहों पर खुफिया जानकारी जुटाने के लिए एक अंडरकवर ऑपरेटिव के रूप में सात साल बिताए हैं।

गुप्त एजेंट के रूप में एक साल के कार्यकाल के बाद उन्होंने छह साल तक इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायोग में काम किया। 1984 के दौरान खालिस्तानी उग्रवाद को खत्म करने के लिए शुरू किए गए ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ से पहले खुफिया जानकारी जुटाने में भी डोभाल की अहम भूमिका रही थी। इसके बाद वे कश्मीर चले गए। अजीत डोभाल ने अपने करियर का एक बड़ा हिस्सा इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के साथ एक सक्रिय क्षेत्र इंटेलिजेंस अधिकारी के रूप में बिताया।

2004 में उन्हें आईबी चीफ बनाया गया। 2014 में अजीत डोभाल ने उन 46 भारतीय नर्सों की रिहाई सुनिश्चित की, जो इराक के तिकरित स्थित एक अस्पताल में फंसी हुई थीं। उन्होंने म्यांमार में एक सफल सैन्य अभियान का नेतृत्व किया।

शरद कुमार, हरियाणा कैडर 1979 बैच के आईपीएस अधिकारी रहे हैं। उन्हें जून 2018 में सीवीसी में सतर्कता आयुक्त नियुक्त किया गया था। अपने करियर की शुरुआत में वे गुरुग्राम, अंबाला और रोहतक के एसपी रहे थे। इसके बाद उन्होंने डीजीपी के एसओ बनकर प्रशासनिक, प्रोविजनिंग और वेलफेयर विंग के लिए काम किया। जुलाई 1990 में वे सीबीआई में आ गए और यहीं पर स्पेशल इन्वेस्टिगेशन यूनिट में बतौर डीआईजी के पद पर पदोन्नत किए गए। रोहतक रेंज के आईजी के अलावा वे राज्य में एडीजीपी क्राइम भी रहे हैं।

2011 में उन्हें डीजी विजिलेंस ब्यूरो लगाया गया। साल 2013 में वे एनआईए के डीजी बन गए। उन्होंने अक्तूबर 2017 तक इस पद पर काम किया। बाद में उन्हें केंद्रीय सतर्कता आयोग में आयुक्त के पद पर लगाया गया। जून 2019 में उन्हें सीवीसी के पद पर नियुक्ति दे दी गई।

सीआरपीएफ के पूर्व डीजी रहे हैं और इनके पास नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में काम करने का लंबा अनुभव है। उनका सबसे चर्चित कार्यकाल तमिलनाडु पुलिस के विशेष कार्य बल के प्रमुख के रूप में रहा था, जब 2004 में कुख्यात चंदन तस्कर वीरप्पन को मौत के घाट उतारा गया। वे भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के 1975-बैच के अधिकारी हैं। उन्हें केंद्र शासित प्रदेश जेके और लेफ्ट विंग चरमपंथ (एलडब्ल्यूई) प्रभावित राज्यों के सुरक्षा संबंधी मामलों पर गृह मंत्रालय को सलाह देने के लिए नियुक्त किया गया है।

इससे पहले वे जम्मू कश्मीर के राज्यपाल के सलाहकार रहे हैं। अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद जम्मू कश्मीर में बिगड़े हालात को सामान्य बनाने में उनका खास योगदान रहा है। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के महानिदेशक पद से रिटायर होने के बाद 2012 में भी उन्हें गृह मंत्रालय में वरिष्ठ सुरक्षा सलाहकार (एलडब्ल्यूई) के रूप में नियुक्त किया गया था।

उन्होंने हैदराबाद में राष्ट्रीय पुलिस अकादमी के निदेशक के रूप में भी कार्य किया है। अब एक बार फिर के. विजय कुमार को केंद्रीय गृह मंत्रालय में सलाहकार नियुक्त किया गया है। जब वे सीआरपीएफ के डीजी थे, तो उस वक्त नक्सलवाद प्रभावित इलाकों खासतौर से छत्तीसगढ़ और झारखंड में कई बड़े ऑपरेशन चलाए गए थे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Articles

Back to top button