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कल्पना को देखने आसमान में टकटकी लगाए थे लोग, तभी हो गई अनहोनी; दे गई जिंदगी भर का गम

: एक फरवरी 2003। एक अंतरिक्ष परी अंतरिक्ष में ही रह गई। स्वागत में पलके बिछाए उसके जन्मभूमि के लोग आज भी इस दिन को नहीं भूल पा रहे हैं। काउंटडाउन चल रहा था। स्कूल में लाइव प्रसारण के जरिए सैकड़ों की तादाद में बच्चे और शिक्षक अपनी कल्पना को साकार होता देखना चाह रहे थे। तभी कुछ ऐसा हुआ कि हर किसी के आंखों में आंसू थे। कुछ तो खुद को संभाल नहीं पाए तो वहीं बैठ गए। इस दर्द भरे हादसे ने करनाल की कल्पना को छीन लिया। आज ही के दिन अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला का शटलयान दुर्घटनाग्रस्त हुआ था।

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