latest

एक-दूसरे की राह आसान बनाना ही इनका ‘टारगेट’, इनके लिए धर्म और जाति नहीं रखती मायने

[नौकरी की तलाश की, कोटे से भी नहीं मिल सकी तो खुद ही नौकरी देने की ठानी और खोल दी फैक्ट्री। दोनों पैरों से दिव्यांग सलमान ने अपनी कमजोरी को ताकत बनाया और अपने जैसे दूसरे लोगों का सहारा बन गया। आज 30 दिव्यागों को रोजगार दे रहा है। इस साल 100 का टारगेट है। मुरादाबाद, उप्र निवासी दिव्यांग युवक सलमान ने सशक्त होकर दूसरे दिव्यांगों को सशक्त करने का बीड़ा उठाया है। जिला मुख्यालय से काशीपुर हाईवे पर करीब 22 किमी दूर मौजूद गांव हमीरपुर में रहने वाले सलमान जन्म से दोनों पैरों से दिव्यांग हैं। कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) की परीक्षा उत्तीर्ण करने के लिए कई साल तक कोशिश करते रहे, सफलता नहीं मिली तो हार नहीं मानी।

पिछले साल दिसंबर में नौकरी की आस छोड़कर खुद काम करने और अपनी तरह के लोगों को रोजगार देने की ठान ली। इसके लिए उन्होंने अपने गांव में पांच लाख रुपये लगाकर किराए के मकान में टारगेट नाम से कंपनी खोली। चप्पल और डिटर्जेंट बनाने का काम शुरू कर दिया। छह महीने पहले से सलमान ने मार्केटिंग शुरू की। अब उनका कारोबार साथियों का वेतन निकालकर लाभ में पहुंच गया है। उनके कारखाने में अब तक 30 दिव्यांग रोजगार से जुड़ गए हैं। उनको स्वरोजगार भी सिखाया जा रहा है, ताकि खुद आत्मनिर्भर हो सकें।
[

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Articles

Back to top button