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इससे पहले पीस पार्टी ने दाखिल की थी याचिका सुप्रीम कोर्ट के फैसले से हित प्रभावित- पीएफआई

अयोध्या के राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद मामले में पीस पार्टी के बाद अब इस्लामिक संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. पीएफआई ने शीर्ष कोर्ट में क्यूरेटिव याचिका दाखिल की है. पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया ने अपनी याचिका में कहा है कि वो भले ही मुख्य मामले में पक्षकार नहीं था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले से उसका हित प्रभावित हुआ है.

याचिका में क्यूरेटिव याचिका पर खुली अदालत में बहस की मांग की गई है. याचिका में मांग की गई है कि सुप्रीम कोर्ट अपने 9 नवंबर 2019 के आदेश पर रोक लगाए जिसमें कोर्ट ने विवादित जमीन का फैसला “रामलला” के हक में दिया था. राम जन्मभूमि मामले में ये दूसरी क्यूरेटिव याचिका दाखिल की गई है. इससे पहले, उत्तर प्रदेश की “पीस पार्टी” ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की थी.

बता दें कि इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट में फैसले को लेकर पुनर्विचार याचिका दाखिल की गई थी. लेकिन अदालत ने सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया था. पुनर्विचार याचिकाओं के खारिज होने के बाद पीस पार्टी ने पहली क्यूरेटिव याचिका दाखिल की थी.

पुनर्विचार याचिकाओं के खारिज होने के बाद पीस पार्टी ने क्यूरेटिव पिटीशन दाखिल करने का फैसला लिया है. 18 पुनर्विचार याचिकाएं पहले ही दाखिल की गई थीं, जो सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बेंच ने खारिज कर दी थीं.

अयोध्या पर फैसला 9 नवंबर को

पिछले साल 9 नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या मामले पर अपना फैसला सुनाया था. सुप्रीम कोर्ट में तत्कालीन चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के नेतृत्व वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने कहा कि इस बात पर फैसला आस्था के आधार पर नहीं होगा. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आस्था के आधार पर जमीन का मालिकाना हक नहीं दिया जा सकता. फैसला कानून के आधार पर दिया जाएगा.

सुप्रीम कोर्ट ने विवादित जमीन का मालिकाना हक रामलला को दे दिया था. जबकि मुस्लिम पक्ष को अलग जगह देने के लिए कहा गया था. यानी सुन्नी वफ्फ बोर्ड को कोर्ट ने अयोध्या में ही अलग जगह 5 एकड़ जमीन देने का आदेश दिया था.

क्या होती है क्यूरेटिव पिटीशन

क्यूरेटिव पिटीशन (उपचार याचिका) पुनर्विचार (रिव्यू) याचिका से थोड़ा अलग होता है. इसमें फैसले की जगह पूरे केस में उन मुद्दों या विषयों को चिन्हित किया जाता है जिसमें उन्हें लगता है कि इन पर ध्यान दिए जाने की जरूरत है.

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