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आवासीय इलाकों में फैक्ट्री चलाने की इजाजत जान पर पड़ी भारी, वोट बैंक की राजनीति में सुरक्षा दांव पर

: खास बातें
जनता के दबाव में कुछ आवासीय इलाकों में व्यावसायिक गतिविधि चलाने की मंजूरी मिली
फायर विभाग और एमसीडी से आवश्यक इजाजत नहीं, सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं
राजनीतिक दबाव सुरक्षा अधिकारियों पर पड़ता है भारी
दिल्ली की जिस इमारत में आग लगने के कारण अब तक 43 लोगों की मौत हो चुकी है, वह व्यावसायिक गतिविधि के लिए नहीं बनाई गई थी। यह एक सामान्य आवासीय भवन था जिसमें व्यावसायिक गतिविधि चल रही थी। बिल्डिंग में व्यावसायिक भवन बनाने की किसी औपचारिकता का पालन भी नहीं किया गया था। किसी इमारत में आग बुझाने के लिए रखे जाने वाले अग्निशमन यंत्र तक वहां उपलब्ध नहीं थे। ऐसे में इस तरह की घटना घटने पर बड़ा हादसा होने की पूरी गुंजाइश रहती है जैसा कि फिल्मिस्तान की इस घटना में हुआ।
दिल्ली में कुछ दिनों पहले सीलिंग का मुद्दा बहुत गरमाया हुआ था। आवासीय इलाकों और कच्ची कालोनियों में चलने वाली छोटी-छोटी फैक्ट्रियों को प्रशासन गैर-कानूनी बताकर सील कर रहा था। इससे लोगों की रोजी-रोटी छिन रही थी और लोग प्रशासन का विरोध कर रहे थे। लोगों की मांग थी कि उन्हें इन जगहों पर गैर-प्रदूषणकारी छोटी-छोटी फैक्ट्रियां चलाने की इजाजत मिलनी चाहिए। वोट बैंक के इसी तरह के एक दबाव में एक कांग्रेस नेता की पहल पर इन कॉलोनियों में व्यावसायिक गतिविधि चलाने की इजाजत कुछ वर्ष पूर्व ही मिल गई थी। लेकिन व्यावसायिक गतिविधि चलाने के पहले सुरक्षा के किसी तरह के इंतजाम नहीं किए गए जिसका खामियाजा आज 43 परिवारों को भुगतना पड़ा है।

इस बार के विधानसभा चुनाव के दौरान भी सीलिंग एक बड़ा मुद्दा माना जा रहा था। इसके लिए हर राजनीतिक दल अपनी पैंतरेबाजी में भी लगा हुआ था। बीजेपी दिल्ली की सभी एरिया में गैर-प्रदूषणकारी फैक्ट्री चलाने के लिए कानून बनाने को अपनी बड़ी उपलब्धि बताकर पेश कर रही थी। वहीं, कांग्रेस यूपीए के शासन में कई कॉलोनी को व्यावसायिक कराने का श्रेय ले रही थी। आम आदमी पार्टी सीलिंग से निजात न दिलाने के लिए केंद्र पर आरोप लगा रही थी। लेकिन इन सारे आरोपों-प्रत्यारोपों में सुरक्षा पर कभी कोई चर्चा नहीं होती जिसकी कीमत यूपी-बिहार से आए गरीब मजदूरों को चुकानी पड़ती है।
राजनीतिक दबाव भारी

दिल्ली अग्निशमन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि यह पूरी एरिया आवासीय गतिविधि के लिए हुआ करता था। लेकिन बाद में यहां पर गैर-प्रदूषणकारी सीमित उद्योंगों को चलाने की अनुमति मिल गई। लेकिन इन भवनों में सुरक्षा के किसी तरह के मानक का पालन नहीं होता है। अगर अग्निशमन विभाग किसी भवन पर इसके लिए दबाव डालता भी है तो उन पर किसी तरह की कार्रवाई न करने का राजनीतिक दबाव पड़ता है जिसके कारण कोई एक्शन ले पाना उनके लिए कठिन हो जाता है।
हर दल का नेता पहुंचा

इस हृदयविदारक घटना के बारे में सुनकर हर दल के प्रमुख राजनेता घटनास्थल पर पहुंचे। इनमें दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा, बीजेपी सांसद प्रवेश वर्मा, दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवारी और अनुराग ठाकुर जैसे नेता घटनास्थल पर पहुंचे और शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी संवेदना प्रकट की।

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