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असम: आसू ने दी चेतावनी, कहा- पीएम ‘खेलो इंडिया’ का उद्घाटन करने आएंगे तो होगा बड़ा प्रदर्शन

नागरिकता संशोधन कानून और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर को लेकर असम में शुरुआत से ही बड़े स्तर पर विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। इसी बीच असम की ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (आसू) ने रविवार को एक चेतावनी दी है। आसू ने कहा कि 10 जनवरी को गुवाहाटी में खेलो इंडिया का उद्घाटन करने अगर पीएम मोदी आएंगे तो बड़े स्तर पर प्रदर्शन किया जाएगा।

आसू अध्यक्ष डी कुमार नाथ ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि भारत और श्रीलंका के बीच पांच जनवरी को गुवाहाटी में होने वाले टी-20 मैच और 10 जनवरी से 22 जनवरी तक चलने वाले ‘खेलो इंडिया’ पर संगठन करीबी नजर बनाए हुए है।

उन्होंने कहा, संशोधित नागरिकता कानून आने के बाद प्रधानमंत्री पहली बार राज्य में संभवत: आने वाले हैं। अगर वह ‘खेलो इंडिया’ में आएंगे तो व्यापक तौर पर विरोध प्रदर्शन होगा। हालांकि, उन्होंने इसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी और कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा की पुष्टि होने के बाद आने वाले दिनों में इसकी जानकारी साझा की जाएगी।

नाथ ने कहा, मोदी और भाजपा असम को बर्बाद करने की योजना बना रहे हैं लेकिन हम चुप नहीं बैठेंगे। सीएए के खिलाफ लंबी लड़ाई होगी। हम सुप्रीम कोर्ट में कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं और हमारा इसमें पूरा विश्वास है। लोकतांत्रिक लड़ाई भी साथ-साथ चलती रहेगी। इस कानून को तत्काल वापस लिए जाने की मांग के साथ आसू के मुख्य सलाहकार एस कुमार भट्टाचार्य ने कहा कि इस आंदोलन से लोगों का ध्यान हटाने की सरकार की कोशिशों का संगठन अवलोकन करेगा।

उन्होंने कहा, आने वाले दिनों में गुवाहाटी में दो खेल होने जा रहे हैं। पहला पांच जनवरी को क्रिकेट मैच और उसके बाद ‘खेलो इंडिया’। हम दोनों पर करीबी नजर बनाए हुए हैं। छात्र नेता ने यह भी पूछा कि असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल अपने उस बयान का स्रोत बताएं जिसमें उन्होंने कहा था कि सिर्फ गिनती के हिंदू बांग्लादेशियों को नागरिकता संशोधन अधिनियम से राज्य में लाभ मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने 14 दिसंबर को कहा था कि वह उचित समय पर वास्तविक संख्या का खुलासा करेंगे। आसू के महासचिव लुरीनज्योति गोगोई ने असम के वित्त मंत्री हेमंत बिश्वशर्मा के आंकड़े पर भी सवाल किया। उन्होंने आरोप लगाया कि शर्मा राज्य में रह रहे अवैध हिंदू बांग्लादेशी लोगों के बारे में अलग-अलग आंकड़े दे रहे हैं। उन्होंने कहा, सरकार भ्रमित करने वाले आंकड़े दे रही है। कभी वह कहती है चार लाख, कभी पांच लाख और कभी 10 लाख। वह कह रहे हैं कि उन्हें यह संख्या एनआरसी से मिली।

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