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अच्छी गुणवत्ता के लिए कपूरथला रेल कोच फैक्‍टरी को बड़ा इनाम, मिलेगा IRIS सर्टिफिकेट

: पंजाब की कपूरथला रेल कोच फैक्‍टरी (आरसीएफ) को अच्‍छे कार्य के लिए बड़ा इनाम मिला है। भारतीय रेलवे की इस फैक्‍टरी को इंटरनेशनल रेलवे इंडस्ट्री स्टैंडर्ड (आइआरआइएस) का ब्रांज सर्टिफिकेट मिलेगा। रेल कोच फैक्टरी को यूरोप की रेलवे सामग्री की आपूर्ति करने वाली संस्था यूनीफे यह सर्टिफिकेट देगी। देश में अभी तक कोई भी सरकारी इंडस्ट्री आइआरआइएस प्रमाणित नहीं है।

यह सर्टिफिकेट पाने वाली आरसीएफ देश की पहली सरकारी रेल फैक्टरी
निजी फैक्टरी एलस्ट्राम ही आइआरआइएस से प्रमाणित देश की इकलौती फैक्टरी है। कपूरथला रेल को फैक्‍टरी देश की पहली सरकारी फैक्टरी होगी जिसे यूनीफे सर्टिफिकेट देगी। यह सर्टिफिकेट फरवरी के मध्य में दिया जाएगा। इसके बाद आरसीएफ के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में दरवाजे खुल जाएंगे।

वर्ष 2017 में हुई है आइआरआइएस की शुरुआत

रेलवे की गुणवत्ता को निखारने के मकसद से वर्ष 2017 में यूनीफे ने इंटरनेशनल रेलवे इंडस्ट्री स्टैंडर्ड सर्टिफिकेट की शुरुआत की है। पूरी दुनिया में अभी तक इसके तहत किसी भी इंडस्ट्री को सिल्वर या गोल्ड सर्टिफिकेट नहीं मिला है। कुछ इंडस्ट्री सिर्फ सर्टिफाइड हैं या फिर उनको ब्रांज सर्टिफिकेट मिले हैं। इसको शुरू करने का मुख्य उद्देश्य रेलवे की गुणवत्ता में व्यापक सुधार लाना है, ताकि सुरक्षा की गारंटी हो सके। कम मानव संसाधन से लागत में कमी लाना भी इसका मकसद है।

निजी फैक्टरी एलस्ट्राम ही आइआरआइएस से प्रमाणित देश की इकलौती फैक्टरी

आरसीएफ महाप्रबंधक रवीन्द्र गुप्ता कहते हैं कि यह सर्टिफिकेट मिलने के बाद आरसीएफ अमेरिका, कनाडा, जर्मनी आदि देशों को कोच सप्लाई कर सकेगी। वह बताते हैं कि नीदरलैंड की दिल्ली स्थित डैट नारसके वानस शाखा पिछले करीब एक साल से आरसीएफ के कोच निर्माण, गुणत्ता एवं कामकाज की निगरानी कर रही है। इस संस्था ने अपनी संस्तुति की। इसके बाद आरसीएफ इस सर्टिफिकेट के लिए चयनित हुई।

विश्‍व में अभी तक सिल्वर व गोल्ड सर्टिफिकेट वाली कोई कोई फैक्‍टरी नहीं, 10 मानकों पर उतरना होता है खरा

आइआरआइएस सर्टिफिकेट के लिए यूनीफे ने दस मानक तय कर रखे हैं। इसमें देखा जाता है कि उपभोक्ताओं की क्या उम्मीदें हैं। हर महीने निर्धारित प्रोफार्मे पर उनकी फीडबैक ली जाती है। वर्कशॉप में काम का पूरा मूल्यांकन होता है। अगर गलती होती है तो उसे ठीक करते हैं, ताकि आगे कोई गलती ना हो। आगे कितने कोच बनाने हैं और कितना मैटीरियल चाहिए।

अगर कोई पहली बार चीज बनती है तो उसके लिए जांच करने का विशेष तरीका होता है। जितने समय तक कोच चलना है, उसके पूरे जीवन का खर्च नियोजित किया जाता है। कोई खराबी होने पर उत्पाद कितना जल्दी ठीक हो सकता है। फैक्टरी में सुरक्षा के मानकों का भी अध्ययन किया जाता है।

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